Daily News Update

1. विश्व का पहला तैरता न्यूक्लियर पावर प्लांट


रूस के सरकारी परमाणु ऊर्जा निगम(रोसैटम) ने सोमवार को बताया कि उसका पानी में तैरने वाला परमाणु विद्युत संयंत्र वाणिज्यिक संचालन के लिए तैयार है  एक बयान में रोसैटम ने यह भी बताया कि तैरने वाले विद्युत संयत्र(एफपीयू) के दो रिएक्टरों को 31 मार्च को सफलतापूर्वक इसकी 100 प्रतिशत क्षमता के लिए तैयार कर लिया गया था और यह इसके मुख्य और सहायक उपकरणों के संचालन और इसके साथ ही स्वचालित प्रक्रिया नियंत्रण प्रणाली की पुष्टि करता है रोसैटम के ऊर्जा विभाग रोसेनेरगोएटम के महानिदेशक आंद्रेई पेट्रोव ने बताया की इन परीक्षणों के आधार पर परिणाम ईपीयू के लिए स्वीकृत प्रमाण पत्र अधिकारियों द्वारा जारी किए जाएंगे और संचालन लाइसेंस की जांच जुलाई में होगी

2. माउंट एवरेस्ट पर 3000 किलो कचरा

माउंट एवरेस्ट जो विश्व का सबसे ऊंचा पहाड़ हैवहां भी कचरे का अंबार लगा दिया गया है पूरी दुनिया के लोग एडवेंचर और कीर्तिमान बनाने के लिये लिए इस पहाड़ की चढ़ाई करते हैंऔर वहा पर कचरा छोड़ आते है माउंट एवरेस्ट को कचरा मुक्त करने के लिए नेपाल ने 14 अप्रैल को “एवरेस्ट क्लीनिंग कैम्पेन” की शुरुआत की है यह कैम्पेन 45 दिनो तक चलेगा अभी तक इस कैम्पेन के द्वारा लगभग 3000 किलो कचरा इकट्ठा किया जा चुका है और इस कैम्पेन के तहत 10000 किलो कचरा इकट्ठा करने का लक्ष्य रखा गया है इस कैम्पेन पर 23 मिलियन नेपाली रुपये खर्च होंगे इस कैम्पेन के द्वारा लोगो से यह अपील की गयी है वो जब भी माउंट एवरेस्ट पर जाये तो उनके द्वारा किये गये कचरे को वापस अपने साथ ले आये ताकि हम माउंट एवरेस्ट को साफ सुथरा रख सके और भविष्य मे आने वाली पीढ़िया भी माउंट एवरेस्ट पर आसानी से आ जा सके

3. टिम बर्नर्स ने www के गिनाए खतरे

पूरी दुनिया के Web Browsers को प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने वाले सिस्टम www यानी World Wide Web को अस्तित्व में आए 30 साल हो चुके हैं इस System को वैज्ञानिक टिम बर्नर्स और रॉबर्ट कैइलिआयू ने सन 1989 मे  तैयार किया था इसके अस्तित्व में आते ही Internet ने पूरी दुनिया को बदलकर रख दिया
इतने सालो के बाद टिम अपने ही विकसित किए हुए System से निराश हो गए हैं टिम Internet के खतरों से परेशान हैं इस संबंध में उन्होंने Open Letter भी लिखा हैजिसमें उन्होंने इस संबंध में चिंता व्यक्त की है Internet के गलत उपयोग और डेटा चोरी के बारे में टिम का कहना है कि इसे आप डायनामाइट की तरह समझ सकते है अलफ्रेड नोबेल ने इसकी खोज माइनिंग के लिए की थी परन्तु डायनामाइट का बड़े स्तर पर गलत इस्तेमाल हो रहा है ठीक वैसे ही World Wide Web यानी Internet के संबंध में हो रहा है टिम ने 12 मार्च 1989 को www को Information Management के नाम से Submit किया था। उन्होंने ही इसके लिए पहली Website भी Design की थी। 20 दिसंबर 1990 को NeXT Computer पर इस Website को Online किया गया था

4. क्या सचमुच भूत होते हैं?

भूतों का विषय बहुत रोमांचक और डरावना होता है हर कोई इनके बारे में जानने की दिलचस्पी रखता है भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में भूतों को लेकर कई तरह की बातें सामने आती हैं वैज्ञानिकों ने पैदा हो रहे डर का जवाब जानने के लिये कई रिसर्च किये इसमे "पैरासाइकोलॉजिस्ट रिसर्च में मुख्य रूप से तीन तरह के शोध शामिल हैं। पहला है, विचित्र किस्म का आभास। इसमें टेलिपैथी, (पहले से आभास होना) जैसी चीजें आती हैं। दूसरा है, मस्तिष्क के जरिए कोई काम करना, जैसे बिना छुए चम्मच को मोड़ देना, तीसरा है, मृत्यु के बाद का संवाद, जैसे भूत प्रेत या आत्माओं से बात करना।"
दरअसल, असामान्य परिरस्थितियों में कई बार हमारी आंखें अलग ढंग से व्यवहार करती हैं कम रोशनी में आंखों की रेटीनल रॉड कोशिकाएं सक्रिय हो जाती हैं और हल्का मुड़ा हुआ सा नजारा दिखाती हैडॉक्टर ओकीफ के मुताबि, "आंख की पुतली को बहुत कोने में पहुंचाकर अगर हम अंतिम छोर से कोई हलचल देखें तो वह बहुत साफ नहीं दिखती है डिटेल भी नजर नहीं आती है सिर्फ काला और सफेद ही दिखता है। इसका मतलब साफ है कि रॉड कोशिकाएं रंग नहीं देख पा रही हैं। हो सकता है कि ऐसी परिस्थितियों में हमारा मस्तिष्क सूचना के अभाव को भरने की कोशिश करता हो दिमाग उस सूचना को किसी तार्किक जानकारी में बदलने की कोशिश करता है। और हमें ऐसा अनुभव होता है जैसे हमने कुछ विचित्र देखा है तर्क के आधार पर हमें लगता है कि शायद कोई भूत है किसी चीज को बिना छुए उसमें हलचल कर देना या फिर पूर्वाभास व टेलिपैथी जैसे वाकये अब भी विज्ञान जगत को हैरान कर रहे हैं मस्तिष्क की कुछ विलक्षण शक्तियां अब भी विज्ञान के दायरे से कोसों दूर हैं

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